तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम नेतुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखेंतुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने— Faiz Ahmad Faiz