उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दीफिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दीमैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव मेंऔर फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी— nakul kumar