Meaning of

शिकस्त

shikast • شکست

हार; असफलता

defeat; failure

شکست; ناکامی

Persian

शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में — Sapna Moolchandani
दीदनी है शिकस्तगी दिल की क्या इमारत ग़मों ने ढायी है! — Meer Taqi Meer
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका — Arzoo Lakhnavi
साहिल पे क़ैद लाखों सफ़ीनों के वास्ते मेरी शिकस्ता नाव है तूफ़ाँ लिए हुए — Salik Lakhnavi
मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी दुनिया से जा मिली — Saqi Faruqi
टूटा तो हूँ मगर अभी बिखरा नहीं 'फ़राज़' मेरे बदन पे जैसे शिकस्तों का जाल हो — Ahmad Faraz
कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी — Abul mujahid zaid
आजकल के शाइरों तुम शा'इरी तो सीख लो है तनाफ़ुर क्या शिकस्त-ए-नारवा क्या चीज़ है — Amaan Pathan
कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला — Ghulam Mohammad Qasir

मूल रूप से, 'शिकस्त' एक ठोस हार या नुकसान का भाव देता है। कविता में, यह भावनात्मक और अस्तित्वगत आयामों को छूता है, मानव प्रयासों की नाजुकता और निराशा के अनिवार्य मुठभेड़ों को दर्शाता है।

'शिकस्त' का उपयोग कवि अक्सर व्यक्तिगत असफलता और हार के खट्टे-मीठे स्वभाव की खोज के लिए करते हैं। यह विजय के विपरीत है, नाजुकता में पाई जाने वाली सुंदरता और हार से सीखे गए सबक को उजागर करता है।

कविता में, 'शिकस्त' जीवन की परीक्षाओं के बीच आत्मा की दृढ़ता को दर्शाने वाला दर्पण बन जाता है।