Meaning of

शिकस्ता

shikasta • شکستہ

टूटा हुआ; बिखरा हुआ; पराजित

broken; shattered; defeated

ٹوٹا ہوا; بکھرا ہوا; شکست خوردہ

Persian

दर-ब-दर किसी जानिब रोज़ चल रहा हूँ मैं
इक अज़ीब सूरत में ख़ुद ही ढल रहा हूँ मैं

कौन जल गया अंदर कौन मर गया मुझ
में
किस की मौत पर तन्हा रोज़ जल रहा हूँ मैं

इतना कहने पर भी जब बदली ही नहीं दुनिया
बे-वजह ही ख़ुद को फिर क्यूँ बदल रहा हूँ मैं

ख़ाक हो चुका है दिल चल रही मिरी साँसें
रफ़्ता रफ़्ता ही ख़ुद के दिन निगल रहा हूँ मैं

ज़िंदगी भला अब ये किस तरह बसर होगी
आज कल ग़मों से भी कब बहल रहा हूँ मैं

4

Download Image

शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

44

Download Image

शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग

44

Download Image

दीदनी है शिकस्तगी दिल की
क्या इमारत ग़मों ने ढायी है!

40

Download Image

बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका

33

Download Image

साहिल पे क़ैद लाखों सफ़ीनों के वास्ते
मेरी शिकस्ता नाव है तूफ़ाँ लिए हुए

14

Download Image

कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला

10

Download Image

ज़िंदगी काटी हिज्र में लेकिन
मौत के दस्तरस नहीं काटी

उस ने डीपी ही बदली जज साहिब
इश्क़ में उस ने नस नहीं काटी

8

Download Image

बस इतनी सी मेरी तक़दीर बदली
कभी ज़िंदाँ कभी ज़ंजीर बदली

न इन आँखों ने अपने ख़्वाब बदले
न ख़्वाबों ने कोई ता'बीर बदली

6

Download Image

कैसे बचता शिकस्तगी से बदन
जलता रहता है तिश्नगी से बदन

अब भी सहमा हुआ है कमरे में
शब-ए-रफ़्ता की तीरगी से बदन

4

Download Image

दर-ब-दर किसी जानिब रोज़ चल रहा हूँ मैं
इक अज़ीब सूरत में ख़ुद ही ढल रहा हूँ मैं

कौन जल गया अंदर कौन मर गया मुझ
में
किस की मौत पर तन्हा रोज़ जल रहा हूँ मैं

इतना कहने पर भी जब बदली ही नहीं दुनिया
बे-वजह ही ख़ुद को फिर क्यूँ बदल रहा हूँ मैं

ख़ाक हो चुका है दिल चल रही मिरी साँसें
रफ़्ता रफ़्ता ही ख़ुद के दिन निगल रहा हूँ मैं

ज़िंदगी भला अब ये किस तरह बसर होगी
आज कल ग़मों से भी कब बहल रहा हूँ मैं

4

Download Image

शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

44

Download Image

'शिकस्ता' का मूल अर्थ है शारीरिक रूप से टूटा या पराजित होना। कविता में, यह अक्सर प्रेम या हानि से टूटे हुए दिल या आत्मा की छवि को दर्शाता है, जिससे भावनात्मक गहराई बढ़ती है।

'शिकस्ता' का उपयोग कवि मानव स्थिति की नाजुकता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अप्राप्त प्रेम, हानि, और सौंदर्य के अवश्यंभावी क्षय के बारे में छंदों में प्रकट होता है।

'शिकस्ता' अपनी काव्यात्मक सार में टूटन में सुंदरता को पकड़ता है, मानव आत्मा की दृढ़ता का प्रमाण है।