Meaning of

शिकस्ता-पा

shikasta-paa • خیرو

टूटा हुआ पैर; थका हुआ यात्री

broken foot; weary traveler

ٹوٹا ہوا پا; تھکا ہوا مسافر

Persian

हम ऐसा कहने वाले जब तलक है ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी — Ali Zaryoun
यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं — Priya omar
सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया — Shubham Rai 'shubh'
जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते — Mohammad Aquib Khan
हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं — Hafeez Jalandhari
बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को — Haidar Ali Aatish
छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो — Trinetra Dubey

'शिकस्ता-पा' शब्द एक ऐसे यात्री की छवि प्रस्तुत करता है जिसने दूर-दूर तक यात्रा की है, थके हुए पैरों पर दुनिया का बोझ उठाए हुए। कविता में, यह सहनशीलता और कमजोरी में छुपी हुई ताकत का सार प्रस्तुत करता है।

कवियों द्वारा 'शिकस्ता-पा' का उपयोग अक्सर जीवन की यात्रा, सामना की गई चुनौतियों और आगे बढ़ने के लिए आवश्यक दृढ़ता का प्रतीक करने के लिए किया जाता है। यह शक्ति और जीवन्तता की छवियों के विपरीत है, धैर्य में सुंदरता को उजागर करता है।

'शिकस्ता-पा' की शांत ताकत में, मानव आत्मा की यात्रा की गहरी सुंदरता मिलती है।