Meaning of

सिसक

sisak • سسک

सिसकी; हल्की रोना

sob; gentle weeping

سسکی; ہلکی رونا

Unknown

तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती — Ankita Singh
इस लिए नहीं रोया अश'आर में वज़्न से बाहर थी मेरी सिसकियाँ — Saad Ahmad
हमारे ख़ौफ़ से बाज़ार उछलते हैं जहाँ भर में सिसकने से हमारे कौन सी सरकार गिरती है — Nomaan Shauque
ये क्या तिलिस्म है क्यूँँ रात भर सिसकता हूँ वो कौन है जो दियों में जला रहा है मुझे — Saqi Faruqi
शब-ए-हिज्राँ में सुनता था, सलीब-ए-वक़्त की सिसकी ये कुछ पागल समझते हैं घड़ी आवाज़ करती है — "Nadeem khan' Kaavish"
आख़िर कौन सिसकता है तेरे अंदर आज उदासी ने भी पूछ लिया मुझ सेे — Rohit Gustakh
गए ज़माने की चाप जिन को समझ रहे हो वो आने वाले उदास लम्हों की सिसकियाँ हैं — Aanis Moin
थोड़ी सिसकी थोड़ी ठिठकी पागल होना अच्छा है जग की गाथा गाने वाले तेरा रोना अच्छा है — Sakshi Saraswat
सदा सुनाई पड़ी सिसकियों की कानों में महीनों बा'द में जब उस को फ़ोन मैं ने किया — Shajar Abbas

सिसक शब्द दुःख की एक मूक, संयमित अभिव्यक्ति को दर्शाता है। कविता में, यह एक दिल के धीरे-धीरे टूटने की नाजुक ध्वनि को पकड़ता है, जो व्यक्तिगत और सार्वभौमिक दोनों है।

कवि अक्सर 'सिसक' का उपयोग प्रेमी के मौन दुःख को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह बिना आवाज़ के गिरने वाले आँसुओं की ध्वनि है, दिल के मूक विलाप की गूंज।

अपनी शांति में, 'सिसक' मानव स्थिति के बारे में बहुत कुछ कहता है। यह आत्मा के गहरे दुःखों की एक फुसफुसाहट है।