होकर तमाम दुनिया में बदनाम आएगा
महफ़िल में आज आशिक़-ए-नाकाम आएगा
ता 'उम्र ता हयात सुब्ह शाम आएगा
मेरे लबों पे सिर्फ़ तेरा नाम आएगा
चेहरा मैं उसका चाँद सा देखूँगा बैठकर
जब देखने वो चाँद सर-ए-बाम आएगा
रुक जाएँगी ये चलती हुई दिल की धड़कने
जिस वक़्त तेरे अग्द का पैग़ाम आएगा
ले लेना नाम मौला का तू दिल से ऐ बशर
ये नाम मुश्किलों में तेरे काम आएगा
देखो सज़ा-ए-हिज्र मिलेगी हमें शजर
हम पर ही बे-वफ़ाई का इल्ज़ाम आएगा
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