Meaning of

सुकून-ए-क़ल्ब

sukoon-e-qalb • سکون قلب

हृदय की शांति; आत्मा की शांति

peace of heart; tranquility of the soul

دل کا سکون; روح کی سکونت

Arabic

अगर यतीम-ओ-ग़रीब की तुम मदद करोगे जज़ा मिलेगी
सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ी मिलेगा ख़ुदा नबी की रज़ा मिलेगी

कभी भी अपने दिलों के अंदर किसी से बुग़्ज़-ओ-हसद न रखना
निज़ाम-ए-रब-उल-क़दीर है ये ख़ता करोगे सज़ा मिलेगी

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सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा

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ये अर्श ओ फ़र्श तलाशा है जब मिली हो तुम
सुकून-ए-क़ल्ब हो मेरा मेरी ख़ुशी हो तुम

तुम्हें गँवाना क़सम से बड़ा ख़सारा है
मता-ए-जान सुनो मेरी ज़िन्दगी हो तुम

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या'नी सुकून-ए-क़ल्ब क़ज़ा चाहता हूँ मैं
इस दर्द-ए-ला-दवा की दवा चाहता हूँ मैं

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सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ीं लबों की हँसी को हमराह लाएगी वो
दयार-ए-जान-ए-वफ़ा से सू-ए-शजर जो बाद-ए-सबा चलेगी

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अगर यतीम-ओ-ग़रीब की तुम मदद करोगे जज़ा मिलेगी
सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ी मिलेगा ख़ुदा नबी की रज़ा मिलेगी

कभी भी अपने दिलों के अंदर किसी से बुग़्ज़-ओ-हसद न रखना
निज़ाम-ए-रब-उल-क़दीर है ये ख़ता करोगे सज़ा मिलेगी

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सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा

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यह वाक्यांश आंतरिक शांति और सुकून की भावना को जागृत करता है, जहाँ हृदय जीवन की उथल-पुथल के बीच विश्राम पाता है। कविता में, यह आंतरिक शांति की अंतिम खोज का प्रतीक है, जो सांसारिक अशांति से परे है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग किसी पात्र की आंतरिक शांति की यात्रा को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह बाहरी अराजकता और आंतरिक शांति के बीच के विपरीत को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है। यह वाक्यांश सच्ची शांति की मायावी प्रकृति को भी उजागर कर सकता है।

कविता में, हृदय की शांति आत्मा की शाश्वत शांति की खोज की एक कोमल याद दिलाती है।