
अगर यतीम-ओ-ग़रीब की तुम मदद करोगे जज़ा मिलेगी
सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ी मिलेगा ख़ुदा नबी की रज़ा मिलेगी
कभी भी अपने दिलों के अंदर किसी से बुग़्ज़-ओ-हसद न रखना
निज़ाम-ए-रब-उल-क़दीर है ये ख़ता करोगे सज़ा मिलेगी
— Shajar Abbas
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