Meaning of

हक़दार

haqdaar • حق دار

अधिकारी; योग्य

entitled; deserving

مستحق; لائق

Arabic

है तख़्त की सदा के हक़दार चाहिए
या'नी कि सल्तनत को सरदार चाहिए

नज़रों को कब ज़रूरत रा'नाई की तिरी
तस्कीन-ए-दिल की ख़ातिर दीदार चाहिए

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मोहब्बत के सितम का हर कोई हक़दार है निर्भय
भटक जाते हैं वो भी जो मोहब्बत भी नहीं करते

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इल्म-ए-अरूज़ न था तेरे लहजे में सलमान
जो कुछ सीखा है उस का हक़दार है तोयेश

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तेरी चाहत के हम भी थोड़े से हक़दार बन जाएँ
यही हसरत है तेरी ओढ़नी के तार बन जाएँ

यक़ीं हम को नहीं होता कभी पहली मुहब्बत का
तमन्ना है तुम्हारे आख़िरी हम प्यार बन जाएँ

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तिरा शहर मेरे सफ़र का भी हक़दार है
मिरा इश्क़ तेरी वफ़ा का तलबगार है

तिरे बा'द ये घाव मेरे भरे ही नहीं
अकेला मेरे मर्ज़ का तू गुनहगार है

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हर शख़्स बराबर का है हक़दार यहाँ पर
ये बज़्म-ए-सुख़न आप की जागीर नहीं है

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हक़, माँगने वालों को मिलता ही नहीं पर अब
हक़ छीनने वाले वो हक़दार नहीं दिखते

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मुझ को मालूम थे उस के सारे क़रम
फिर लगा एक मौक़े' की हक़दार है

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हूँ मुश्त-ए-ख़ाक तू उपकार कर दे
हक़ीक़त का मुझे हक़दार कर दे

शिकायत-गर भी करते हैं तशक्कुर
तू जिस की ज़िंदगी हमवार कर दे

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है तख़्त की सदा के हक़दार चाहिए
या'नी कि सल्तनत को सरदार चाहिए

नज़रों को कब ज़रूरत रा'नाई की तिरी
तस्कीन-ए-दिल की ख़ातिर दीदार चाहिए

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मोहब्बत के सितम का हर कोई हक़दार है निर्भय
भटक जाते हैं वो भी जो मोहब्बत भी नहीं करते

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‘हक़दार’ शब्द में अधिकार या पात्रता की भावना होती है। कविता में, यह अक्सर न्याय और योग्यता के विषयों को उजागर करता है, जहाँ किसी व्यक्ति या भावना की योग्य प्रकृति को रेखांकित किया जाता है।

कवि 'हक़दार' का उपयोग समाज के नैतिक ताने-बाने में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की आंतरिक योग्यता, किसी कारण की न्यायप्रियता, या किसी सपने के अधिकार को प्रतिबिंबित कर सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'हक़दार' न्याय और मूल्य की मौन प्रतिध्वनियों के साथ गूंजता है।