है तख़्त की सदा के हक़दार चाहिएया'नी कि सल्तनत को सरदार चाहिएनज़रों को कब ज़रूरत रा'नाई की तिरीतस्कीन-ए-दिल की ख़ातिर दीदार चाहिए— Wasif Iqbal