Meaning of

हॅंस

hans • ہنس

हंस; हँसी

swan; laughter

ہنس; ہنسی

Sanskrit

कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है
ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है

एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने
कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है

69

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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया

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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं
दिल हमेशा उदास रहता है

117

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आज तो दिल के दर्द पर हँस कर
दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने

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रोया हूँ तो अपने दोस्तों में
पर तुझ से तो हँस के ही मिला हूँ

107

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मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है

88

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मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं
तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर

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लिख के उँगली से धूल पे कोई
ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई

याद कर के किसी के चेहरे को
रख गया होंठ फूल पे कोई

77

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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है
एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी

75

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न सहम कर न डर के छोड़ता है
हंस तालाब मर के छोड़ता है

वक़्त बर्बाद करने वालों को
वक़्त, बर्बाद कर के छोड़ता है

70

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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है
ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है

एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने
कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है

69

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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया

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अपने मूल अर्थ में, 'हंस' सुंदर पक्षी, हंस का उल्लेख करता है, जो अक्सर पवित्रता और सुंदरता से जुड़ा होता है। कविता में, इस शब्द को गहरे अर्थों से भर दिया गया है, जो आत्मा की यात्रा, ज्ञान और अस्तित्व की अलौकिकता का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'हंस' का उपयोग शांत सुंदरता और पारलौकिकता की छवियों को उभारने के लिए करते हैं। यह आत्मा की पवित्रता या आनंद की क्षणभंगुरता का प्रतिनिधित्व कर सकता है। हंस की सुंदरता को जीवन के अराजकता के साथ विपरीत किया जाता है, जो स्थिरता का एक क्षण प्रदान करता है।

'हंस' शब्द सुंदरता और क्षणभंगुरता के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।