Meaning of

ख़फ़ा

KHafaa • خفا

गुस्सा; नाराज़; अप्रसन्न

angry; displeased; offended

خفا; ناراض; ناخوش

Arabic

देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया

38

Download Image

मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के

99

Download Image

आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को

81

Download Image

बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है

80

Download Image

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

53

Download Image

तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो

मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो

51

Download Image

यार इस
में तो मज़ा है ही नहीं
कोई भी हम सेे ख़फ़ा है ही नहीं
इश्क़ ही इश्क़ है महसूस करो
और कुछ इस के सिवा है ही नहीं

47

Download Image

यूँँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना

45

Download Image

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से

43

Download Image

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

40

Download Image

देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया

38

Download Image

मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के

99

Download Image

'ख़फ़ा' शब्द अप्रसन्नता या नाराज़गी की भावना को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर गुस्से की धीमी सुलगन या चोट के सूक्ष्म रंगों को समेटे होता है, जो मानव भावनाओं की जटिलता को पकड़ता है।

कवि 'ख़फ़ा' का उपयोग गुस्से और चोट के सूक्ष्म परतों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो भीतर की मौन आंधियों को पकड़ता है, अधिक स्पष्ट क्रोध के भावों के विपरीत।

कविता में, 'ख़फ़ा' हृदय की असंतोष की मौन गहराईयों को प्रकट करता है।