Meaning of

आमद

aamad • آمد

आगमन; आगाज़; प्रेरणा

arrival; advent; inspiration

آمد; آغاز; تحریک

Arabic

ग़रीबी कभी कद नहीं देखती है
ये रिश्तों की भी ग़द नहीं देखती है

ज़माना सिखा देता है सब यहाँ तो
ये नज़रें यूँँ आमद नहीं देखती है

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इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं
आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं

माना मंज़िल नहीं मिली है हम को लेकिन रोज़ाना
एक क़दम उस की जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं

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हर एक चौखट खुली हुई थी हर इक दरीचा खुला हुआ था
कि उस की आमद पे दर यहाँ तक कि बेघरों का खुला हुआ था

ये तेरी हम्म ने हमें ही उलझन में डाल रक्खा है वरना हम पर
तमाम साइंस के फ़लसफ़ों का हर एक चिट्ठा खुला हुआ था

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शराब खींची है सब ने ग़रीब के ख़ूँ से
तू अब अमीर के ख़ूँ से शराब पैदा कर

तू इंक़लाब की आमद का इंतिज़ार न कर
जो हो सके तो अभी इंक़लाब पैदा कर

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सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तेरी आवाज़ के साथ

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लिखने को आमादा है क्या
ये भी कोई वा'दा है क्या

फूलों के संग दर्द दिए
बोल तेरा इरादा है क्या

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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वो आमादा है रिश्ता तोड़ देने पर
चलो झूठी दलीलें मान लेते हैं

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मेरा दरवाज़ा खुला रह गया जिन की ख़ातिर
उन की आमद न हुई, मेरा इशारा न हुआ

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ख़ास इतनी है नहीं आमद तुम्हारी
फिर हमारे दिल की धड़कन क्यूँँ बढ़ी तब

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ग़रीबी कभी कद नहीं देखती है
ये रिश्तों की भी ग़द नहीं देखती है

ज़माना सिखा देता है सब यहाँ तो
ये नज़रें यूँँ आमद नहीं देखती है

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इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं
आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं

माना मंज़िल नहीं मिली है हम को लेकिन रोज़ाना
एक क़दम उस की जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं

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‘आमद’ शब्द किसी महत्वपूर्ण चीज़ के कोमल आगमन को दर्शाता है, जब साधारण को असाधारण द्वारा छुआ जाता है। कविता में, यह अक्सर प्रेरणा या प्रिय के आगमन का प्रतीक होता है, जो मौन से अभिव्यक्ति की ओर संक्रमण को चिह्नित करता है।

कवि 'आमद' का उपयोग प्रेरणा के आगमन को दर्शाने के लिए करते हैं। यह वसंत, एक नए विचार, या प्रेमी के आगमन को सूचित कर सकता है। यह 'रफ़त' के विपरीत है, जो प्रस्थान का संकेत देता है।

अपने सार में, 'आमद' शुरुआत की सुंदरता को पकड़ता है। यह आगमन की शक्ति की एक कोमल याद दिलाता है।