Meaning of

आज़िज़

aaziz • عزیز

प्रिय; प्यारा; चहेता

beloved; dear; cherished

محبوب; پیارا; عزیز

Arabic

मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन
किसी ने मुझ को गिरफ़्तार कर के छोड़ दिया

11

Download Image

रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है

307

Download Image

ज़ुलेख़ा-ए-अज़ीज़ाँ बात ये है
भला घाटे का सौदा क्यूँ करें हम

80

Download Image

याराँ वो जो है मेरा मसीहा-ए-जान-ओ-दिल
बे-हद अज़ीज़ है मुझे अच्छा किए बग़ैर

मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर

67

Download Image

अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए

44

Download Image

तुम्हारे शहर में तोहमत है ज़िंदा रहना भी
जिन्हें अज़ीज़ थीं जानें वो मरते जाते हैं

42

Download Image

बहुत क़रीब रही है ये ज़िन्दगी हम से
बहुत अज़ीज़ सही ए'तिबार कुछ भी नहीं

32

Download Image

दीवार क्या गिरी मिरे ख़स्ता मकान की
लोगों ने मेरे सेहन में रस्ते बना लिए

30

Download Image

हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा
चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा

28

Download Image

उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज
जभी तो सूखती जाती हैं प्यार की झीलें

19

Download Image

मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन
किसी ने मुझ को गिरफ़्तार कर के छोड़ दिया

11

Download Image

रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है

307

Download Image

'आज़िज़' अपने मूल में गहरी स्नेह और निकटता का भाव प्रकट करता है। यह शब्द प्रिय को एक गर्म आलिंगन में बांधता है, केवल स्नेह नहीं बल्कि एक चहेते संबंध का संकेत देता है। कविता में, यह अक्सर शब्द के पार जाकर आत्माओं को जोड़ने वाले गहरे संबंधों को व्यक्त करता है।

कवि अक्सर 'आज़िज़' का उपयोग अपनी स्नेह की गहराई व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह शब्द प्रेम की खुशी और वियोग की पीड़ा दोनों को व्यक्त कर सकता है। यह शब्द उन छंदों में पाया जा सकता है जो प्रिय की उपस्थिति का जश्न मनाते हैं या उनकी अनुपस्थिति का शोक करते हैं।

कविता की दुनिया में, 'आज़िज़' प्रेम की स्थायी शक्ति का प्रमाण है। यह किसी को प्रिय मानने के अर्थ को समेटे हुए है।