urooj par hai azeezo fasaad ka suraj | उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज

  - Nami Nadri

उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज
जभी तो सूखती जाती हैं प्यार की झीलें

  - Nami Nadri

Fasad Shayari

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    वो लड़कर भी सो जाए तो उसका माथा चूमूँ मैं
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    उस ने फिर प्यार जताया है ख़ुदा ख़ैर करे
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    Nami Nadri
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    फिर उसे ख़्वाब में देखा है ख़ुदा ख़ैर करे
    वो मिरे ज़ेहन पे छाया है ख़ुदा ख़ैर करे

    उस ने फिर प्यार जताया है ख़ुदा ख़ैर करे
    कोई तो नेक इरादा है ख़ुदा ख़ैर करे

    हर घड़ी एक धमाका है ख़ुदा ख़ैर करे
    हर नफ़स ख़ून का प्यासा है ख़ुदा ख़ैर करे

    ये किसी की भी हुई है तो बताए कोई
    ज़िंदगी एक छलावा है ख़ुदा ख़ैर करे

    मसनूई चेहरा लगाए हुए है हर कोई
    अब दिखावा ही दिखावा है ख़ुदा ख़ैर करे

    ग़ालिबन ज़िंदा जलाया गया होगा कोई
    चौक में कैसा धुआँ सा है ख़ुदा ख़ैर करे

    फिर कोई गुल वो खिलाएगा यक़ीनन यारो
    मुस्कुराता हुआ आया है ख़ुदा ख़ैर करे

    हम ने जिस शख़्स पे ये ज़ीस्त निछावर कर दी
    अब वही आँखें दिखाता है ख़ुदा ख़ैर करे

    शिकवा संजी का ज़माना नहीं ये ऐ नामा
    वक़्त नाज़ुक है बुढ़ापा है ख़ुदा ख़ैर करे
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    Nami Nadri

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