Meaning of

बयान

bayaan • نقص

वक्तव्य; अभिव्यक्ति

statement; expression

بیان; اظہار

Arabic

तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा
ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है

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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया

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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और

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तुम इस का नुक़सान बताती अच्छी लगती हो
वरना हम को शौक़ नहीं है सिगरेट-नोशी का

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रोना हो आसान हमारा
इतना कर नुक़्सान हमारा

बात नहीं करनी तो मत कर
चेहरा तो पहचान हमारा

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ग़म बयाँ करने का कोई और ढंग ईजाद कर
तेरी आँखों का ये पानी तो पुराना हो गया

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मेरी हर बात बे-असर ही रही
नक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या

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एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती है

दोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहीं
दोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है

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वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है

वो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है

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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा
ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है

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'बयान' मूल रूप से एक वक्तव्य या अभिव्यक्ति को संदर्भित करता है, विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का एक साधन। कविता में, यह मात्र शब्दों से परे जाता है, कवि की आत्मा के लिए एक माध्यम बन जाता है, अनकहे सत्य और गहरी भावनाओं के सार को पकड़ता है।

कवि 'बयान' का उपयोग अव्यक्त को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन छंदों में पाया जाता है जो अव्यक्त को व्यक्त करने का प्रयास करते हैं, दिल की मौन गहराइयों को आवाज़ देने के लिए, और भावनाओं की छिपी परतों को प्रकट करने के लिए।

काव्यिक क्षेत्र में, 'बयान' मौन और अभिव्यक्ति के बीच पुल बन जाता है, शब्दों की शक्ति का प्रमाण।