Meaning of

बे-हयाई

be-hayaai • روایت

बेशर्मी; लज्जा का अभाव

shamelessness; lack of modesty

بے شرمی; حیا کا فقدان

Persian

जैसा कह रहे हो वैसा नहीं है
दर्द तुम ने अभी देखा नहीं है

बे-वफ़ाई है दुनिया की रिवायत
बे-वफ़ाई कोई धोखा नहीं है

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इश्क़ में हो बे-वफ़ाई बे-हयाई बे-कली
तुम को गर मंज़ूर है तो हम को भी मंज़ूर है

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दिल लगा के दगा हम नहीं करते हैं
बेवफाई हमारी रिवायत नहीं

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बे-वफ़ाई आदत है
बे-हयाई फ़ितरत है

मेरे जैसे आशिक़ हैं
आशिक़ी पे लानत है

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इक रिवायत थी निभानी सो निभा दी मैं ने
छोड़ कर जाते हुए ख़ूब दुआ दी मैं ने

उस को बस इतना ही कह पाया कि ख़ुश रहना और
दिल की दीवार से तस्वीर हटा दी मैं ने

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हमें मालूम नहीं था ये मुसीबत है
हमें ये इल्म नहीं था की रिवायत है

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हाँ जिस्म की हवस का आग़ाज़ करते हैं वो
अपनी ही बे-हयाई पे नाज़ करते हैं वो

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मुझे मिलने जो आते हो रिवायत भूल जाते हो
कभी आशिक़ को लाते हो कभी भूले से आते हो

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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बे-हयाई न हुई इत्र हुई बे-ढंगी
बा-हया तो कभी इस रंग में बे-बाक न हो

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जैसा कह रहे हो वैसा नहीं है
दर्द तुम ने अभी देखा नहीं है

बे-वफ़ाई है दुनिया की रिवायत
बे-वफ़ाई कोई धोखा नहीं है

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इश्क़ में हो बे-वफ़ाई बे-हयाई बे-कली
तुम को गर मंज़ूर है तो हम को भी मंज़ूर है

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बे-हयाई शब्द एक प्रकार की दुस्साहसिता और निर्भीकता का भाव जगाता है, जिसमें अक्सर नकारात्मक अर्थ छिपा होता है। अपने मूल अर्थ में, यह लज्जा या शालीनता के अभाव को दर्शाता है, एक ऐसी स्थिति जहाँ सामाजिक मर्यादाओं की अनदेखी की जाती है। कविता में, इस शब्द का प्रयोग मानव व्यवहार की गहराइयों को टटोलने के लिए किया गया है, नैतिकता की सीमाओं और उन्हें चुनौती देने के साहस पर प्रश्न उठाते हुए।

कवि अक्सर 'बे-हयाई' का उपयोग उन पात्रों को चित्रित करने के लिए करते हैं जो सामाजिक मानदंडों को चुनौती देते हैं। इसका उपयोग व्यक्तिगत इच्छाओं और सामुदायिक अपेक्षाओं के बीच तनाव को उजागर करने के लिए किया जाता है। यह शब्द सामाजिक पाखंड की आलोचना करने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, जहाँ लज्जा की कमी की निंदा भी होती है और गुप्त रूप से प्रशंसा भी।

अपने काव्यात्मक सार में, 'बे-हयाई' पाठक को साहस और अशिष्टता के बीच की महीन रेखा पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। यह समाज के लज्जा के साथ जटिल संबंध का दर्पण है।