Meaning of

चरागाँ

charaagan • چراغاں

प्रकाश; उत्सव; जश्न

illumination; festivity; celebration

روشنی; جشن; تقریب

Persian

किसी दैर मस्जिद चराग़ाँ नहीं
है कैसा ये पागल ज़माना नया

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कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए
कहाँ चराग़ मुयस्सर नहीं शहर के लिए

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महफ़िल में तेरी यूँँ ही रहे जश्न-ए-चरागाँ
आँखों में ही ये रात गुज़र जाए तो अच्छा

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प्यार की जोत से घर घर है चराग़ाँ वर्ना
एक भी शम्अ' न रौशन हो हवा के डर से

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होने दो चराग़ाँ महलों में क्या हम को अगर दीवाली है
मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम मज़दूर की दुनिया काली है

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ख़्वाबों में सही रोज़ सताने के लिए आ
आ फिर से मिरे दिल को चुराने के लिए आ

हर कोई समझता है मुझे काँच का मरहम
कुछ और हूँ मैं इनको बताने के लिए आ

हर बार तिरे बस में कहाँ मुझ को उठाना
इस बार निगाहों से गिराने के लिए आ

वो रात वही दिन वही तन्हाई का आलम
आँखों में वही प्यास जगाने के लिए आ

साँसों के चराग़ाँ तिरी ज़ुल्फ़ों ने बुझाए
अब तू ही जनाज़े को उठाने के लिए आ

इक तेरे सिवा था ही मिरा कौन जहाँ में
सो क़ब्र की भी रस्म निभाने के लिए आ

जिन दस्त-ए-मुबारक में मिरी जान बसी थी
मस्जिद में वही हाथ उठाने के लिए आ

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हम चराग़ाँ करेंगे दिल अपना
ईद यादों के संग गुज़रेगी

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हर घर दियों से ही हमीं महफ़िल सजाते हैं चलो
जश्न-ए-चराग़ाँ भी सभी मिल के मनाते हैं चलो

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ख़ुदा है वो अलाउद्दीन का कोई चराग़ाँ तो नहीं जिस को
जरा रगड़ा तो निकला जिन्न लम्हे में ही कर दी ख़्वाहिशें पूरी

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चल कर 'शजर' ये शहर में सब को बताइए
दिल भर के रक़्स कीजिए महफ़िल सजाइए

माज़ी की सारी दिल से मिटाकर क़ुदूरतें
सब मिल के साथ जश्न-ए-चराग़ाँ मनाइए

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किसी दैर मस्जिद चराग़ाँ नहीं
है कैसा ये पागल ज़माना नया

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कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए
कहाँ चराग़ मुयस्सर नहीं शहर के लिए

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चरागाँ रोशनी की चमक को जगाता है, चमकते दीपों की एक गाथा जो रात को उत्सव में बदल देती है। कविता में, यह आनंद, एकता और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।

कवि चरागाँ का उपयोग उत्सव और सामूहिक आनंद के दृश्यों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह एक त्योहार की रात को चित्रित कर सकता है, जहाँ हर दीपक आशा और नवीकरण की कहानी कहता है।

चरागाँ प्रकाश का नृत्य है, एक काव्यात्मक याद दिलाता है कि सबसे अंधेरी रात भी एक दीपक की चमक से बदल सकती है।