Meaning of

चराग़-ए-वफ़ा

charagh-e-wafa • ہوئے

वफ़ादारी का दीपक; निष्ठा का प्रकाश

lamp of loyalty; beacon of faithfulness

وفا کا چراغ; وفاداری کی روشنی

Persian

इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए
जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

295

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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे
अपनी दुनिया बुरी लग गई

जिस को आबाद करते हुए
मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई

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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते
मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं

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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर
जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ
जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं

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दूरी हुई तो उन सेे क़रीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए

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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए
और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए

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इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए
जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

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मूल रूप में, 'चराग़-ए-वफ़ा' एक स्थिर प्रकाश की छवि प्रस्तुत करता है, जो अंधकार में मार्गदर्शक होता है। कविता में यह शब्द अटल वफ़ादारी और सच्ची निष्ठा के स्थायित्व का प्रतीक बन गया है।

'चराग़-ए-वफ़ा' का उपयोग कवि अक्सर कठिनाइयों के बीच वफ़ादारी के स्थायी प्रकाश को दर्शाने के लिए करते हैं। यह क्षणिक भावनाओं के विपरीत, सच्ची निष्ठा की शाश्वत प्रकृति को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'चराग़-ए-वफ़ा' वफ़ादारी की स्थायी शक्ति का प्रमाण है। इसका प्रकाश कभी मंद नहीं पड़ता।