Meaning of

फ़रोश

farosh • فروش

विक्रेता; बेचने वाला

seller; vendor

بیچنے والا; فروخت کنندہ

Persian

हुआ दिल किसी पे फ़िदा रफ़्ता- रफ़्ता
चला प्यार का सिलसिला रफ़्ता- रफ़्ता

मुहब्बत की बातें तुम्हें क्या बताएँ
मुहब्बत से सब कुछ मिला रफ़्ता- रफ़्ता

ख़ुशी आज मुझ को मिली है जहाँ की
ग़मों का अँधेरा मिटा रफ़्ता- रफ़्ता

यक़ीनन इधर आएगी आज ख़ुशबू
चली फिर से बादे सबा रफ्ता- रफ्ता

रची जिस ने साज़िश गिराने की मुझ को
वही मुझ को गिरता दिखा रफ़्ता- रफ़्ता

बुज़ुर्गों की सेवा करें जो जतन से
मिले उन की जग में दुआ रफ़्ता- रफ़्ता

कठिन राह पर हौसला साथ हो तो
मिले मंज़िलों का पता रफ़्ता- रफ़्ता

"कमल" मुझ को तूफ़ाँ डरा पाएँगे क्या
सफ़र पर सफ़ीना चला रफ़्ता- रफ़्ता

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तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर

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वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ
नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ

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सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

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दुनिया पे अपने इल्म की परछाइयाँ न डाल
ऐ रौशनी-फ़रोश अँधेरा न कर अभी

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तुम मुझे नश्तर दिखाई देती हो
क़त्ल कितनों का किया तुम ने अब तक

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रहता हूँ बेक़रार सा इक हम सफ़र को मैं
ऐ आसमान क्या करूँँगा रहगुज़र को मैं

दिल मेरा तार-तार है मैं क्या बताऊँ अब
बोलो के क्या बताऊँगा बादे सहर को मैं

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तुम्हारे बस में जो भी था वो तुम ने कर दिया अब
हमारे रस में विष भरना था तुम ने भर दिया अब

कभी बाज़ी हमारे हाथ आएगी तो बचना
कि हम ने भी उसी विष में डुबो नश्तर दिया अब

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हमारी बस्ती से लश्कर ये कह के लौट गया
चलो यहाँ से यहाँ सरफ़रोश रहते हैं

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एक बाप उतरा है ज़िस्मफ़रोशी के धंधे में
दस घण्टों की ख़ातिर मेरा ज़िस्म आप का मालिक

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हुआ दिल किसी पे फ़िदा रफ़्ता- रफ़्ता
चला प्यार का सिलसिला रफ़्ता- रफ़्ता

मुहब्बत की बातें तुम्हें क्या बताएँ
मुहब्बत से सब कुछ मिला रफ़्ता- रफ़्ता

ख़ुशी आज मुझ को मिली है जहाँ की
ग़मों का अँधेरा मिटा रफ़्ता- रफ़्ता

यक़ीनन इधर आएगी आज ख़ुशबू
चली फिर से बादे सबा रफ्ता- रफ्ता

रची जिस ने साज़िश गिराने की मुझ को
वही मुझ को गिरता दिखा रफ़्ता- रफ़्ता

बुज़ुर्गों की सेवा करें जो जतन से
मिले उन की जग में दुआ रफ़्ता- रफ़्ता

कठिन राह पर हौसला साथ हो तो
मिले मंज़िलों का पता रफ़्ता- रफ़्ता

"कमल" मुझ को तूफ़ाँ डरा पाएँगे क्या
सफ़र पर सफ़ीना चला रफ़्ता- रफ़्ता

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तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर

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'फ़रोश' का मूल अर्थ है कोई जो वस्तुएं या सेवाएं बेचता है। लेकिन कविता में, यह शब्द अक्सर एक गहरी भावना को दर्शाता है, जो मानवीय संबंधों या भावनाओं के लेन-देन के स्वभाव को इंगित करता है। बेचने की क्रिया भावनाओं, विश्वास या आत्मा के आदान-प्रदान का रूपक बन जाती है।

कवि अक्सर 'फ़रोश' का उपयोग विश्वासघात, भौतिकवाद और प्रेम के वस्तुकरण के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो पवित्रता या निःस्वार्थता को दर्शाते हैं, भौतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के बीच तनाव को उजागर करते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'फ़रोश' हमें सांसारिक इच्छाओं की खोज में हम क्या खो देते हैं, इस पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है। यह हमारे अपने मूल्यों का एक दर्पण है।