
रहता हूँ बेक़रार सा इक हम सफ़र को मैं
ऐ आसमान क्या करूँगा रहगुज़र को मैं
दिल मेरा तार-तार है मैं क्या बताऊँ अब
बोलो के क्या बताऊँगा बादे सहर को मैं
— Navneet krishna
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