Meaning of

गहनाई

gehnaai • گہرائی

गहराई; गंभीरता

depth; profundity

گہرائی; گہرائی

Persian

चाहे आब-ओ-ताब समझ लो या फिर कोई ख़्वाब समझ लो
आवारा फिरना है मुझ को चाहो तो महताब समझ लो

समझो मुझ को गहराई से पहचानो तो परछाईं से
एक अकेला ही काफ़ी हूँ बेशक तुम सैलाब समझ लो

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आपने मुझ को डुबोया है किसी और जगह
इतनी गहराई कहाँ होती है दरिया में

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तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में
पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में

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नाप रहा था एक उदासी की गहराई
हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई

वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है
हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई

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देखनी है आप को जो ग़म की गहराई तो फिर
मेरी इन आँखों में अपनी आँख रख कर देखिए

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नापता हूँ मैं ख़यालात की गहराई को
कौन समझेगा मेरी बात की गहराई को

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घास की तरह पड़े हैं हम लोग
न बुलंदी है न गहराई है

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मुझे अपना किनारा कम था 'दानिश'
बढ़ा ली मैं ने फिर गहराई अपनी

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क्यूँँ खुल गए लोगों पे मिरी ज़ात के असरार
ऐ काश कि होती मिरी गहराई ज़रा और

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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चाहे आब-ओ-ताब समझ लो या फिर कोई ख़्वाब समझ लो
आवारा फिरना है मुझ को चाहो तो महताब समझ लो

समझो मुझ को गहराई से पहचानो तो परछाईं से
एक अकेला ही काफ़ी हूँ बेशक तुम सैलाब समझ लो

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आपने मुझ को डुबोया है किसी और जगह
इतनी गहराई कहाँ होती है दरिया में

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गहनाई शब्द कुछ विशाल और अगम्य का आभास कराता है। कविता में, यह अक्सर भावनात्मक या बौद्धिक गहराई का प्रतीक होता है, जो आसानी से समझ में नहीं आता। यह अज्ञात की यात्रा का संकेत देता है, जहाँ सतह केवल एक शुरुआत है।

कवि 'गहनाई' का उपयोग आत्मनिरीक्षण और आत्मा के रहस्यों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेम की गहराई या दुःख की खाई का वर्णन कर सकता है। अक्सर सतहीता के विपरीत, यह पाठकों को अर्थ की परतों में गहराई से जाने के लिए आमंत्रित करता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'गहनाई' स्पष्ट से परे खोजने का आह्वान है। यह अज्ञात को अपनाने का निमंत्रण है।