Meaning of

ग़म-ए-हयात

gham-e-hayaat • غم حیات

जीवन का दुःख; अस्तित्वगत पीड़ा

sorrow of life; existential grief

زندگی کا غم; وجودی غم

Persian

तू भी ग़म-ए-हयात का है मारा और मैं भी
चल इश्क़ छोड़ दर्द का रिश्ता बनाते हैं

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ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें

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ग़म-ए-हयात में यूँँ ढह गया नसीब का घर
कि जैसे बाढ़ में डूबा हुआ गरीब का घर

वबायें आती गईं और लोग मरते गए
हमारे गाँव में था ही नहीं तबीब का घर

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इलाज-ए-इश्क़ मुसलसल जो कर गए होते
दिलों के ज़ख़्म यक़ीनन ही भर गए होते

तुम्हारे इश्क़ ने मुझ को बचा लिया वर्ना
ग़म-ए-हयात से अब तक तो मर गए होते

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तू भी ग़म-ए-हयात का है मारा और मैं भी
चल इश्क़ छोड़ दर्द का रिश्ता बनाते हैं

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ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें

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ग़म-ए-हयात मानव स्थिति के साथ आने वाले गहन दुःख को पकड़ता है, जो जीवन के अनिवार्य संघर्षों और नुकसानों पर एक चिंतन है। कविता में, यह अस्तित्वगत विषयों की एक मार्मिक खोज बन जाती है, जो मानव भावनाओं की गहराइयों और अर्थ की खोज में उतरती है।

कवि 'ग़म-ए-हयात' का उपयोग अस्तित्व के सार्वभौमिक दुःख को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अधूरी इच्छाओं के दर्द और जीवन की अस्थिरता के भार को उभार सकता है। यह शब्द आनंद के विपरीत होता है, मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर करता है।

ग़म-ए-हयात दुःख के माध्यम से साझा मानव यात्रा की याद दिलाता है। यह जीवन की अनिवार्य चुनौतियों का सामना करने में पाए जाने वाले धैर्य की बात करता है।