Meaning of

ग़मो

ghamo • غموں

दुःख; पीड़ा

sorrows; griefs

غم; دکھ

Arabic

ज़िन्दगी के मसअलों पर मुस्कुरा
या'नी अपने सब ग़मों पर मुस्कुरा

गर जो चाहा वो न तुझ को मिल सके
अपनी घटती ख़्वाहिशों पर मुस्कुरा

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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए

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दीदनी है शिकस्तगी दिल की
क्या इमारत ग़मों ने ढायी है!

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हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया

ग़मों से बैर था सो हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
शजर ने गिर के परिंदों से इन्तेक़ाम लिया

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ये सोचके तो दूसरी कोई मिट्टी को छु'आ नहीं
के बा'द मरने के हिन्दुस्तां में दफनाया जाऊँगा

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जो उस तरफ़ से इशारा कभी किया उस ने
मैं डूब जाऊँगा दरिया को पार करते हुए

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आप कहिए तो सही 'पास नहीं रहना है'
मैं बहुत दूर बहुत दूर चला जाऊँगा!

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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

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ख़ुशी की बात और है ग़मों की बात और
तुम्हारी बात और है हमारी बात और

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ग़मों को बेच रहा हूँ मैं इस लिए शायद
कहा था बाप ने पैसा बहुत ज़रूरी है

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ज़िन्दगी के मसअलों पर मुस्कुरा
या'नी अपने सब ग़मों पर मुस्कुरा

गर जो चाहा वो न तुझ को मिल सके
अपनी घटती ख़्वाहिशों पर मुस्कुरा

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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए

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'ग़मो' शब्द गहरे दुःख और उदासी की भावना को जागृत करता है। अपने मूल अर्थ में, यह दिल के बोझों का उल्लेख करता है, जो एकांत के मौन साथी होते हैं। कविता ने इस शब्द को मानव पीड़ा की गहराइयों को खोजने के लिए अपनाया है, अक्सर इसे आत्मा में मंडराते हुए एक छाया के रूप में दर्शाया है।

कवि अक्सर 'ग़मो' का उपयोग अनकहे दुःखों के भार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह ग़ज़लों में प्रिय है, जहाँ यह क्षणिक खुशियों के विपरीत होता है। यह शब्द मौन आँसुओं और अनकहे विलापों की तस्वीर खींचता है।

कविता की दुनिया में, 'ग़मो' दुःख के साझा मानव अनुभव की याद दिलाता है। यह दिल की सहनशीलता का प्रमाण है।