Meaning of

ग़र्ब

ghurb • غرب

पश्चिम; निर्वासन; परायापन

west; exile; alienation

مغرب; جلاوطنی; بیگانگی

Arabic

मेरा क़िस्सा सुन‌ के बोला पास तेरे सब है यार
और ग़ुरबत में कटी है मेरी पूरी ज़िंदगी

2

Download Image

ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया

52

Download Image

कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है

40

Download Image

नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा
परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा

वही हाकिम वही ग़ुर्बत वही क़ातिल वही ग़ासिब
बताओ कितने सालों में हमारा हाल बदलेगा

32

Download Image

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द

27

Download Image

सच की डगर पे जब भी रक्खे क़दम किसी ने
पहले तो देखी ग़ुर्बत फिर तख़्त-ओ-ताज देखा

10

Download Image

इंसाँ के ज़मीरों को जला देती है ग़ुर्बत
कुछ बात है दर उस का अँधेरे में खुला है

4

Download Image

भले हों ख़ून के रिश्ते या दुनिया के फ़रिश्ते हों
ग़म-ए-ग़ुर्बत के मारों को सहारा कौन देता है

3

Download Image

कुछ इस तरह तेरी यादों में डूबता है दिल
वो जैसे शाम को मग़रिब में डूबता है शम्स

3

Download Image

दुआ अम्मी की है मेरी ये ग़ुर्बत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे

2

Download Image

मेरा क़िस्सा सुन‌ के बोला पास तेरे सब है यार
और ग़ुरबत में कटी है मेरी पूरी ज़िंदगी

2

Download Image

ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया

52

Download Image

'ग़र्ब' शब्द में दूरी और अलगाव का भाव निहित है। मूल रूप में यह पश्चिम दिशा को दर्शाता है, जहाँ सूर्य अस्त होता है, जो दिन के अंत का प्रतीक है। समय के साथ, यह निर्वासन और परायापन की भावनाओं को भी समेटे हुए है, जहाँ व्यक्ति अपने वतन या प्रियजनों से दूर होता है।

'ग़र्ब' का उपयोग कवि अक्सर अलगाव की उदासी को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह दूर देशों की भौतिक यात्रा या अकेलेपन की भावनात्मक यात्रा को दर्शा सकता है। यह 'मशरिक़' के विपरीत है, जो पूर्व दिशा को दर्शाता है और शुरुआत और आशा का प्रतीक है।

कविता में 'ग़र्ब' की गूंज उस सार्वभौमिक थीम के साथ होती है, जिसमें तड़प और अपनापन खोजने की चाह होती है। यह एक ऐसा शब्द है जो दिल की मौन पुकार को पकड़ता है।