Meaning of

गु़स्ताख़

gustakh • گستاخ

ढीठ; साहसी

insolent; audacious

گستاخ; دلیر

Persian

अभी तुम ने मेरी बदमाशियाँ देखी कहाँ है
मरीज़-ए-इश्क़ की गुस्ताख़ियाँ देखी कहाँ है

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तुम रहबर हो फरिश्तों के गुस्ताख़
क्यूँ पागल आदमी में उलझे हो

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फिर न कीजे मिरी गुस्ताख़-निगाही का गिला
देखिए आप ने फिर प्यार से देखा मुझ को

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हाथ सर पे रख रहे गुस्ताख़ ख़ाली
जल गया जब सब बची है राख़ ख़ाली

इन ठिकानों पर भला अब कौन चहके
सब परिंदे उड़ गए हैं शाख़ ख़ाली

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बड़े गुस्ताख़ निकले तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा
मेरी ही दी मशालों से मेरा ही घर जलाते हो

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गवारा है उसे गुस्ताख़ियाँ मुझ सेे जो सरज़द हो
जिसे बस इक नज़र भर देखने को आइना तरसे

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उस की नादाँ आँखों की गुस्ताख़ियाँ ये दिल जलाए
क़त्ल कर के जैसे कोई जिस्म भी क़ातिल जलाए

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मकर-ओ-फ़रेब ज़ुल्म जहालत फ़ुजूर से
गुस्ताख़ियों के दहर से ख़ुद को निकाल लो

तहज़ीब-ओ-इल्म-ओ-फ़न ये तमद्दुन अदब शजर
लो अपने ख़ानवादे का विरसा सँभाल लो

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ये धुँध आख़िर कब छठेगी ज़िंदगी की राह से
और कब खिलेगी धूप जिस सेे ज़ीस्त होगी ख़ुश-नुमा

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अभी तुम ने मेरी बदमाशियाँ देखी कहाँ है
मरीज़-ए-इश्क़ की गुस्ताख़ियाँ देखी कहाँ है

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तुम रहबर हो फरिश्तों के गुस्ताख़
क्यूँ पागल आदमी में उलझे हो

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मूल रूप से, 'गुस्ताख़' एक ऐसी साहसिकता को दर्शाता है जो असम्मान की सीमा पर होती है। कविता में, यह अक्सर विद्रोह और श्रद्धा के बीच के तनाव को पकड़ता है, एक साहस और शिष्टाचार का नृत्य।

कवि 'गुस्ताख़' का उपयोग विद्रोह और चुनौती के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी की साहसी प्रगति या सत्य की खोज में आत्मा की दुस्साहसिकता का वर्णन कर सकता है।

कविता में, 'गुस्ताख़' उन लोगों की भावना को दर्शाता है जो परंपरा को चुनौती देने का साहस रखते हैं।