हाथ सर पे रख रहे गुस्ताख़ ख़ालीजल गया जब सब बची है राख़ ख़ालीइन ठिकानों पर भला अब कौन चहकेसब परिंदे उड़ गए हैं शाख़ ख़ाली— Subodh Sharma "Subh"