Meaning of

हक़ीक़त-ए-ग़म

haqeeqat-e-gham • حقیقت غم

दुःख की वास्तविकता; शोक की सच्चाई

reality of sorrow; truth of grief

غم کی حقیقت; دکھ کی سچائی

Arabic

यूँँ तो बिछड़ने का वो ग़म था दर्द से भरा हुआ
हम दूर भी चले गए और पीछे देखते रहे

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अब हो भी जावे सहर तो क्या करूँँगा
वो ग़म-ए-शब मेरी बीनाई ले डूबी

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दिल अब उदास भी नहीं न बे-क़रार है
बस ख़ाक में ही मिलने का इंतिज़ार है

जिस के सहारे हयात ए ज़िन्दगी का लुत्फ था
वो ग़म भी आजकल किसी पे उधार है

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कभी मिरे दिल से पूछो क्या और चाहता है
वही ग़म-ए-इश्क़ होता वो ग़म-गुसार होता

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वो ग़म देने में अव्वल है
मैं ग़म सहने में अव्वल हूँ

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वो ग़म में है उस के ग़मों को भगा दो
यही वक़्त है उस को अपना बना लो

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आने से जिस के मिलती थी एक अलग ही ख़ुशी हमें
दरिया-ए-ज़िंदगी से वो ग़म की लहर चली गई

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खड़ी है दूर बहुत फिर भी पास लगती है
लिबास ए ज़ीस्त में वो ग़म शनास लगती है

हमारी तिश्ना लबी का लगाओ अंदाज़ा
तुम्हारी आँखों में रह कर भी प्यास लगती है

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वो ग़म-शनास है पर मेरा ग़म-गुसार नहीं
पसंद करता हूँ उस को पर उस से प्यार नहीं

जिगर के पार हुआ था तिरे कमाँ का तीर
किसी के तीर में वरना तो ऐसी धार नहीं

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क़िस्सा-ए-इश्क़ में जो ग़म था वो ग़म छोड़ दिया
हर्फ़-ए-बे लिख के मुअर्रिख़ ने क़लम तोड़ दिया

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यूँँ तो बिछड़ने का वो ग़म था दर्द से भरा हुआ
हम दूर भी चले गए और पीछे देखते रहे

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अब हो भी जावे सहर तो क्या करूँँगा
वो ग़म-ए-शब मेरी बीनाई ले डूबी

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‘हक़ीक़त-ए-ग़म’ शब्द दुःख की गहरी समझ में उतरता है, जहाँ शोक केवल एक भावना नहीं बल्कि अस्तित्व की एक मौलिक सच्चाई है। कविता में यह अक्सर मानव अनुभव की गहराई और पीड़ा की अनिवार्यता को दर्शाता है।

मानव दुःख की गहराई का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। कवि इसका उपयोग शोक की अपरिहार्य प्रकृति को व्यक्त करने के लिए कर सकते हैं। यह अक्सर जीवन के अंतर्निहित संघर्षों पर एक चिंतन के रूप में कार्य करता है।

कविता में, 'हक़ीक़त-ए-ग़म' आत्मा के मौन विलाप का दर्पण है।