दिल अब उदास भी नहीं न बे-क़रार है बस ख़ाक में ही मिलने का इंतिज़ार हैजिस के सहारे हयात ए ज़िन्दगी का लुत्फ थावो ग़म भी आजकल किसी पे उधार है— Parwez Akhtar