खड़ी है दूर बहुत फिर भी पास लगती हैलिबास ए ज़ीस्त में वो ग़म शनास लगती हैहमारी तिश्ना लबी का लगाओ अंदाज़ातुम्हारी आँखों में रह कर भी प्यास लगती है— Sangwan