Meaning of

ख़फ़ा

khafa • خفا

नाराज़; अप्रसन्न; खिन्न

angry; displeased; offended

ناراض; ناخوش; خفا

Arabic

देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया

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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के

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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को

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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है

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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

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तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो

मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो

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यार इस
में तो मज़ा है ही नहीं
कोई भी हम सेे ख़फ़ा है ही नहीं
इश्क़ ही इश्क़ है महसूस करो
और कुछ इस के सिवा है ही नहीं

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यूँँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना

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लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से

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फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

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देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया

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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के

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'ख़फ़ा' शब्द में भावनात्मक अशांति की सूक्ष्मता है, जो अक्सर व्यक्तिगत या अंतरंग असहमति की ओर इशारा करती है। कविता में, यह केवल क्रोध से परे जाकर, आहत गर्व या मौन पीड़ा का प्रतीक बन जाता है।

'ख़फ़ा' का उपयोग कवि अक्सर अनकहे गिले-शिकवे और संबंधों की नाजुकता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की मौन अश्रु या मित्रों के बीच की खामोश दूरी की छवि प्रस्तुत कर सकता है।

अपनी खामोशी में, 'ख़फ़ा' दिल के अनकहे उथल-पुथल को बखूबी बयां करता है।