Meaning of

ख़लक़

khalq • خلق

सृष्टि; प्रकृति; स्वभाव

creation; nature; temperament

خلق; فطرت; مزاج

Arabic

ऐ नए साल बता तुझ में नया-पन क्या है
हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यूँ शोर मचा रक्खा है

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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है

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अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल
मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यूँँ तेरा घर मिले

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ख़ल्क़-ए-आदम से आज तक अकबर
कोई हक़ को छुपा नहीं पाया

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हाँ शख़्स था तो मैं सही, उम्मीद करने ख़्वाब की
अफ़सोस के ख़ल्क़त रही है ख़्वाब की ख़ातिर ग़लत

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है ज़माना बस रही ख़िल्क़त नहीं
है फ़साना बस रही लज़्ज़त नहीं

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चंद दिन को तख़्त पर हैं आप इसे मंज़िल न समझें
गो अभी ख़ामोश है पर ख़ल्क़ को बुज़दिल न समझें

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जबीन-ए-दिल पे किया पहले ख़ल्क़ चेहरा-ए-जाँ
फिर उस का आँखों के होंठों से हम ने बोसा लिया

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नाम आया जो मिरे मन में तिरा
तेरी तस्वीर ख़ल्क़ करने लगा

कर के तस्वीर फिर मैं ख़ल्क़ तिरी
उस
में मैं रंग-ए-सुर्ख़ भरने लगा

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ऐ नए साल बता तुझ में नया-पन क्या है
हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यूँ शोर मचा रक्खा है

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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है

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मूल रूप से 'ख़लक़' का अर्थ है सृष्टि या सृजन का कार्य। कविता में, यह प्रकृति के सार और प्राणियों के अंतर्निहित गुणों को समाहित करता है।

कवि अक्सर 'ख़लक़' का उपयोग अस्तित्व के रहस्यों और ब्रह्मांड की दिव्य कला में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह सृष्टि की सुंदरता और जटिलता को उजागर कर सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ख़लक़' ब्रह्मांड की असीम रचनात्मकता का प्रमाण है।