Meaning of

खुम

kham • خم

वक्र; मोड़; मरोड़

curve; bend; twist

خم; موڑ; پیچ

Arabic

तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए
आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी

78

Download Image

तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

332

Download Image

तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते
मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं

202

Download Image

जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी
जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं

132

Download Image

एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे

तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा
ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे

95

Download Image

मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में

93

Download Image

न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं

86

Download Image

दिल के दरवाज़े भेड़ कर देखो
जख़्म सारे उधेड़ कर देखो

बंद कमरे में आईने से कभी
तुम मेरा जिक्र छेड़ कर देखो

85

Download Image

लोग काँटों से बच के चलते हैं
मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं

80

Download Image

किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा

79

Download Image

तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए
आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी

78

Download Image

तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

332

Download Image

'खुम' शब्द एक कोमल वक्र या सूक्ष्म मोड़ का सुझाव देता है, अक्सर किसी रूप की सुंदरता या स्थिति की जटिलता का वर्णन करने के लिए उपयोग होता है। कविता में, यह घुमावदार रास्तों या प्रिय के भौंह के सुंदर वक्र की छवि प्रस्तुत करता है।

कवि 'खुम' का उपयोग अपूर्णता में सुंदरता, अप्रत्याशित के आकर्षण को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह भाग्य के उतार-चढ़ाव या मानव भावना की नाजुक जटिलताओं का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'खुम' हमें जीवन के वक्रों में पाई जाने वाली सुंदरता और इसकी अप्रत्याशितता की याद दिलाता है।