Meaning of

खौ़फ

khau'f • خوف

डर; भय; आशंका

fear; dread; apprehension

خوف; ڈر; اندیشہ

Arabic

परिंद क्यूँँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं
कि इक दरख़्त हूँ और साया-दार मैं भी हूँ

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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

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यहाँ मौत का ख़ौफ़ कुछ यूँँ है सब को
कि जीने की ख़ातिर मरे जा रहे हैं

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तुम पर इक दिन मरते मरते मर जाना है,
दीवाने को कहाँ ख़बर है घर जाना है

एक शब्द तुम को अंधेरे का ख़ौफ़ दिला कर,
बा'द में ख़ुद भी जान बूझकर डर जाना है

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हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें
ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें

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ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम

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दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहीं
दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं

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मसाइल तो बहुत से हैं मगर बस एक ही हल है
सहरस शाम तक सर मेरा है बेगम की चप्पल है

मेरे मालिक भला इस सेे बुरी भी क्या सज़ा होगी
मेरा शादीशुदा होना ही दोज़ख़ की रिहर्सल है

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इस ख़ौफ़ में कि ख़ुद न भटक जाएँ राह में
भटके हुओं को राह दिखाता नहीं कोई

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भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है
ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई

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परिंद क्यूँँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं
कि इक दरख़्त हूँ और साया-दार मैं भी हूँ

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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

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खौ़फ एक गहरे बैठे डर या भय को दर्शाता है, जो अक्सर मन की छायाओं में छिपा रहता है। कविता में, यह अपनी तीव्रता के साथ भावनात्मक परिदृश्य को आकार देने वाला एक शक्तिशाली बल बन जाता है। यह बेचैनी की मौन फुसफुसाहट है जो आत्मा को परेशान कर सकती है।

कवि 'खौ़फ' का उपयोग असुरक्षा और अज्ञात विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह स्वयं के भीतर की बाधाओं या बाहरी खतरों का प्रतिनिधित्व कर सकता है जो बड़े पैमाने पर मंडराते हैं। यह साहस के विपरीत है, डर और बहादुरी के बीच संघर्ष को उजागर करता है।

कविता में खौ़फ मानव स्थिति का प्रमाण है, जहां डर और साहस एक नाजुक संतुलन में नृत्य करते हैं।