Meaning of

ख़ूं

khoon • خوں

खून; जीवन शक्ति; बलिदान

blood; life force; sacrifice

خون; زندگی کی قوت; قربانی

Arabic

इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग

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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ

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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

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रंग की अपनी बात है वर्ना
आख़िरश ख़ून भी तो पानी है

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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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नहीं देखी है शकल तक उस की
ख़्वाब में किस की शकल देखूँ मैं

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जाने क्या कुछ कर बैठा है
बहुत दिनों से घर बैठा है

वो मधुमास लिखे भी कैसे
शाखों पर पतझर बैठा है

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अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ
मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं

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आँखें देखूँ तो नज़र चेहरे से हट जाती है
ऐसी औरत है मुकम्मल नहीं देखी जाती

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इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग

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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ

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ख़ूं, अपने सार में, खून को दर्शाता है, वह जीवनदायिनी तरल जो जीवन को बनाए रखता है। कविता में, यह अक्सर जीवन शक्ति, जुनून, या अंतिम बलिदान का प्रतीक होता है, प्रेम, युद्ध, या शहादत के विषयों में एक गहनता जोड़ता है।

कवि 'ख़ूं' का उपयोग मानव भावनाओं की कच्चाई को उजागर करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की कीमत या बलिदान के साहस का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह अक्सर संघर्ष के संदर्भों में प्रकट होता है, मानव संघर्षों की गंभीरता को रेखांकित करता है।

'ख़ूं' जीवन और बलिदान के सार के साथ धड़कता है। यह मानव अनुभव की गहन गहराइयों की याद दिलाता है।