Meaning of

ख़ूँदार

khudaar • خوندار

ख़ूनी; रक्तरंजित

bloody; blood-stained

خونی; خون آلود

Persian

ख़ुदारा मुझे यूँँ न हैरत से देखो
यक़ीं तो करो बाख़ुदा बेखु़दी है

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हैरान इस क़दर भी हमपर न हों ख़ुदारा
एक शक़्स बच गया है नाराज़ कर रहे हैं

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मैं थक गया हूँ ख़ुदारा उदासी होते हुए
किसी के सुर्ख़ लबों का मुझे तबस्सुम कर

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कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ

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हमें अब इश्क़ में पड़ना नहीं है
ख़ुदारा जंग ये लड़ना नहीं है

तुम्हारे ख़्वाब से तंग आ गए हैं
हमें अब ख़्वाब में सड़ना नहीं है

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मुझे थी सौंपनी गर तो, ज़रा सी नम, नरम रखते
ख़ुदारा अधपकी मिट्टी, कहाँ साँचें में आएगी

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किस के बुलाने पर चला आया यहाँ
है कौन वो जिस का नज़ारा कट गया

क्या एक टुकड़ा भी बचा सकता नहीं
क्या दिल मिरा पूरा ख़ुदारा कट गया

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नाख़ुदा है, ख़ुदा नहीं है वो
अब ख़ुदारा, ख़ुदा ख़ुदा कीजे

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कँवल जैसा तुम्हारा चेहरा गर आँगन में हो मेरे
तो फिर ये घर ख़ुदारा घर नहीं गुलदान हो जाए

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हर इक क़यास से आगे निकल गया हूँ मैं
ज़माना कहता है बिल्कुल बदल गया हूँ मैं

मेरे वुजूद को वैसे मिटा तो देता वो
ख़ुदारा वक़्त से पहले सँभल गया हूँ मैं

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ख़ुदारा मुझे यूँँ न हैरत से देखो
यक़ीं तो करो बाख़ुदा बेखु़दी है

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हैरान इस क़दर भी हमपर न हों ख़ुदारा
एक शक़्स बच गया है नाराज़ कर रहे हैं

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ख़ूँदार शब्द हिंसा और तीव्रता की भावना को जगाता है। अपने मूल अर्थ में, यह रक्त से सने हुए किसी चीज़ की ओर इशारा करता है, जो संघर्ष के दृश्य या गहरे भावनात्मक उथल-पुथल के क्षण का संकेत देता है। कविता में, यह शब्द अक्सर जुनून और तीव्र भावनाओं के परिणाम का भार वहन करता है।

कवि 'ख़ूँदार' का उपयोग युद्ध या भावनात्मक संघर्ष के दृश्य को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की तीव्रता के परिणामस्वरूप या जीवन के संघर्षों से छोड़े गए निशानों का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द कोमल शब्दों के विपरीत, मानव अनुभव की कच्ची वास्तविकता को उजागर करता है।

ख़ूँदार जीवन के कच्चे और बिना छाने हुए क्षणों का सार पकड़ता है। यह हमें मानव अस्तित्व में गुँथे हुए सौंदर्य और पीड़ा की याद दिलाता है।