Meaning of

ख़ुदारा

khudaara • خدارا

भगवान के लिए; कृपया

for God's sake; please

خدا کے لیے; براہ کرم

Arabic

ख़ुदारा मुझे यूँँ न हैरत से देखो
यक़ीं तो करो बाख़ुदा बेखु़दी है

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हैरान इस क़दर भी हमपर न हों ख़ुदारा
एक शक़्स बच गया है नाराज़ कर रहे हैं

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मैं थक गया हूँ ख़ुदारा उदासी होते हुए
किसी के सुर्ख़ लबों का मुझे तबस्सुम कर

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कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ

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हमें अब इश्क़ में पड़ना नहीं है
ख़ुदारा जंग ये लड़ना नहीं है

तुम्हारे ख़्वाब से तंग आ गए हैं
हमें अब ख़्वाब में सड़ना नहीं है

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मुझे थी सौंपनी गर तो, ज़रा सी नम, नरम रखते
ख़ुदारा अधपकी मिट्टी, कहाँ साँचें में आएगी

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किस के बुलाने पर चला आया यहाँ
है कौन वो जिस का नज़ारा कट गया

क्या एक टुकड़ा भी बचा सकता नहीं
क्या दिल मिरा पूरा ख़ुदारा कट गया

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नाख़ुदा है, ख़ुदा नहीं है वो
अब ख़ुदारा, ख़ुदा ख़ुदा कीजे

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कँवल जैसा तुम्हारा चेहरा गर आँगन में हो मेरे
तो फिर ये घर ख़ुदारा घर नहीं गुलदान हो जाए

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हर इक क़यास से आगे निकल गया हूँ मैं
ज़माना कहता है बिल्कुल बदल गया हूँ मैं

मेरे वुजूद को वैसे मिटा तो देता वो
ख़ुदारा वक़्त से पहले सँभल गया हूँ मैं

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ख़ुदारा मुझे यूँँ न हैरत से देखो
यक़ीं तो करो बाख़ुदा बेखु़दी है

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हैरान इस क़दर भी हमपर न हों ख़ुदारा
एक शक़्स बच गया है नाराज़ कर रहे हैं

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'ख़ुदारा' अभिव्यक्ति एक प्रार्थना है जो दिव्य हस्तक्षेप या दया की याचना करती है। कविता में, यह अक्सर एक गहरी तात्कालिकता या निराशा की भावना को व्यक्त करता है, जहाँ वक्ता एक उच्च शक्ति से सांत्वना या सहायता की तलाश करता है।

कवि 'ख़ुदारा' का उपयोग एक दिल से की गई प्रार्थना को व्यक्त करने के लिए करते हैं, अक्सर तीव्र भावनाओं के क्षणों में। यह मदद के लिए पुकार, दया की याचना, या समझ के लिए अपील का संकेत दे सकता है। यह शब्द कविता में आध्यात्मिक गहराई की एक परत जोड़ता है।

कविता में, 'ख़ुदारा' एक गहन दिव्य करुणा की आह्वान के रूप में गूंजता है। यह पवित्र पर मानव आत्मा की निर्भरता का प्रमाण है।