Meaning of

खुश्क़

khushk • خشک

सूखा; बंजर; निर्जल

dry; arid; barren

خشک; بنجر; بے آب

Persian

दश्त है इस सफ़र में दरिया है
इश्क़ की रहगुज़र में दरिया है

ख़ुश्क आँखों से ख़ून बहता है
उसे लगता है घर में दरिया है

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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का

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आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई
ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई

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मोहब्बत में इक ऐसा वक़्त भी दिल पर गुज़रता है
कि आँसू ख़ुश्क हो जाते हैं तुग़्यानी नहीं जाती

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मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर
सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है

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जिस को देखा नहीं कई दिन से
वो है दिल में मकीं कई दिन से

ख़ुश्क दरिया से मुझ को याद आया
मैं भी रोया नहीं कई दिन से

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बड़ा ही ख़ुश्क है ये हिज्र-ए-आलम, ज़ख़ीरे दोनों अब कम पड़ रहे हैं
यूँँ मुरझाने लगे ख़्वाबों के जंगल, मिरी आँखों से पत्ते झड़ रहे हैं

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कैसे कह दूँ के तिरी ख़ुश्कियों से हारा हूँ
देख अब तक तिरी आँखों को मैं गवारा हूँ

लाख इल्ज़ाम मिरे सर पे ज़माने के मगर
मिरी नज़रों से मुझे देख कितना प्यारा हूँ

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अपने दिल की ज़मीं के आख़िरी कोने में कहीं
माज़ी को दफना के आऊंँगा , चला जाऊँँगा

सहरा को सर्द हवा ने किया है इतना खु़श्क
रेत पर दरया बनाऊँगा , चला जाऊँँगा

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न पूछ हाल मिरा चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ
लगा के आग मुझे कारवाँ रवाना हुआ

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दश्त है इस सफ़र में दरिया है
इश्क़ की रहगुज़र में दरिया है

ख़ुश्क आँखों से ख़ून बहता है
उसे लगता है घर में दरिया है

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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का

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'खुश्क़' शब्द एक ऐसे परिदृश्य की कठोरता को दर्शाता है जो पानी, जीवन या भावना से रहित है। कविता में, यह अक्सर खालीपन या जीवन और भावना की कमी का प्रतीक होता है, जो जीवन और भावना की हरियाली के विपरीत होता है।

'खुश्क़' का उपयोग कवि भावनात्मक वीरानी या बंजर हृदय को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह सौंदर्य से रहित परिदृश्य या जुनून से रहित आत्मा का वर्णन कर सकता है। अक्सर 'सब्ज़' जैसे शब्दों के साथ विपरीतता में जीवन की अनुपस्थिति को उजागर करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

'खुश्क़' अपनी कठोरता में जीवन और भावना की अनुपस्थिति पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है। यह एक ऐसा शब्द है जो एकांत की शांत गूंज के साथ गूंजता है।