कब पलट कर वो तुझे दीदा-ए-तर देखेंगे
जाने वाले तो फ़क़त अपना सफ़र देखेंगे
इस से आगे का हर इक फ़ैसला तुझ पर छोड़ा
जाते जाते तुझे हम एक नज़र देखेंगे
तेरे क़दमों से लिपटती हुई मिट्टी की क़सम
जब तक आँखें हैं तेरी राह-गुज़र देखेंगे
रत-जगे सिर्फ़ तेरे साथ मज़ा देते हैं
तू न होगा तो कहाँ दोस्त सहर देखेंगे
अब करम हो कि सितम हम तो यहीं के ठहरे
वो नहीं हम जो किसी और का दर देखेंगे
हम रहें या न रहें पर तेरा रस्ता प्यारे
गाँव की टूटी सड़क गाँव के घर देखेंगे
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