
कैसे कह दूँ के तिरी ख़ुश्कियों से हारा हूँ
देख अब तक तिरी आँखों को मैं गवारा हूँ
लाख इल्ज़ाम मिरे सर पे ज़माने के मगर
मिरी नज़रों से मुझे देख कितना प्यारा हूँ
— Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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