Meaning of

लैली

laili • لیلی

प्रेमिका; सौंदर्य का प्रतीक

beloved; a symbol of beauty

محبوبہ; حسن کی علامت

Arabic

कोई लड़की लैला है क्या
लौंडे सब मजनूँ मजनूँ हैं

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग

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ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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अगरचे इश्क़ में मजनू बड़े बदनाम होते हैं
अगरचे क़ैस जैसे आशिक़ों के नाम होते हैं

भटक सकती नहीं जंगल में लैला चाह कर के भी
अजी लैला को घर में दूसरे भी काम होते हैं

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उस ओर जा रहे हो तो लैला को बोलना
मजनूँ का सब्र टूट गया इक किसान पर

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धुआँ सिगरेट का और याद तेरी
इन्हीं दोनों ने मेरी जान लेली

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अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया

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हम तो फिर भी होश में है जाँ तुम्हारे इश्क़ में
हीर राँझे कैस लैला थे दिवाने इश्क़ में

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कब तलक ये दास्ताँ हम को सुनाई जाएगी
क्या कभी आया नहीं है लैला मजनू का बदल

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कोई लड़की लैला है क्या
लौंडे सब मजनूँ मजनूँ हैं

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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लैली एक शाश्वत प्रेमिका की छवि प्रस्तुत करती है, जो अनुपम सौंदर्य और गरिमा की प्रतीक है। कविता में, वह केवल एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि एक आदर्श है, एक प्रेरणा जो लालसा और प्रशंसा को जन्म देती है।

कवि अक्सर लैला का उपयोग अप्राप्य सौंदर्य के प्रतीक के रूप में करते हैं। वह इच्छा की पराकाष्ठा और अधूरी प्रेम की पीड़ा का प्रतिनिधित्व करती है। उसका नाम चाँदनी रातों और फुसफुसाते रहस्यों की छवियाँ उकेरता है।

लैली सौंदर्य और लालसा का शाश्वत प्रतीक बनी रहती है, जो हमेशा कविता के हृदय में अंकित है।