Meaning of

लरज

larj • لرز

काँपना; थरथराना

tremble; shiver

کانپنا; تھرتھرانا

Persian

शम्स पर कोहरे की थोड़ी गर्द है
धूप है मद्धम सी मौसम सर्द है

शाख़ पर ये कैफ़ियत है फूल की
जिस्म में लर्ज़ा है चेहरा ज़र्द है

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दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए

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इन लरज़ते लबों से क्यूँँ तू ने
सुर्ख़ आँखों को फिर छुआ ही नहीं

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मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़

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पैरों में लर्जिश हार का संदेशा है
हिम्मत सफ़लता की अकेली साथी है

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मेरा उस को जब चूमने का हुआ मन
वो लरजा के बोली इजाज़त मुझे है

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पता मुझ को तेरा ये दिल मुझी से इश्क़ को लरज़े
करूँँ मैं क्या लगी है भीड़ लैलाओं की पहले से

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लरज रही हैं गुलिस्ताँ में पत्तियाँ गुल की
ये लग रहा है कोई हादसा नया होगा

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याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ
क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं

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सफ़र के वक़्त वो मुझ को सवार करते हुए
लरज़ते होंठों से बोली 'शजर' ख़ुदा हाफ़िज़

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शम्स पर कोहरे की थोड़ी गर्द है
धूप है मद्धम सी मौसम सर्द है

शाख़ पर ये कैफ़ियत है फूल की
जिस्म में लर्ज़ा है चेहरा ज़र्द है

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दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए

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'लरज' शब्द उस नाज़ुक एहसास को व्यक्त करता है जो डर या ठंड से जुड़ा होता है। कविता में, यह उन क्षणों की नाज़ुकता और अस्थिरता को पकड़ता है जब दिल या आत्मा गहरी भावनाओं से प्रभावित होती है।

'लरज' का उपयोग कवि पत्तों की हवा में काँपने, प्रेमी के दिल की थरथराहट, या अशांत आत्मा की नाज़ुक स्थिति को दर्शाने के लिए करते हैं।

अपने काँपने में, 'लरज' ताकत और नाज़ुकता के बीच की मौन बातचीत को प्रकट करता है।