Meaning of

मा'यूब

ma'yub • معیوب

दोषपूर्ण; त्रुटिपूर्ण; आपत्तिजनक

flawed; defective; objectionable

عیب دار; ناقص; قابل اعتراض

Arabic

क्या कहूँ क्या खूब लिक्खा है
भूख को महबूब लिक्खा है

संग जो सिर आके टकराया
ख़ुद ही को मायूब लिक्खा है

रात ने दिन को लिखे ख़त में
निकली हूँ मैं डूब लिक्खा है

रूह पर्दे में बदन के है
इश्क़ को महजूब लिक्खा है

बोझ बनकर ज़िंदगी ने अब
माथे पर मस्लूब लिक्खा है

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मायूब जिस जिस ने बताया है मुझे
मैं मर गई उस वक़्त ही उन के लिए

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क्या कहूँ क्या खूब लिक्खा है
भूख को महबूब लिक्खा है

संग जो सिर आके टकराया
ख़ुद ही को मायूब लिक्खा है

रात ने दिन को लिखे ख़त में
निकली हूँ मैं डूब लिक्खा है

रूह पर्दे में बदन के है
इश्क़ को महजूब लिक्खा है

बोझ बनकर ज़िंदगी ने अब
माथे पर मस्लूब लिक्खा है

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मायूब जिस जिस ने बताया है मुझे
मैं मर गई उस वक़्त ही उन के लिए

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'मा'यूब' शब्द अपूर्णता या दोष की भावना को व्यक्त करता है। काव्यात्मक संदर्भों में, यह अक्सर मानव स्थिति को उजागर करता है, जो हमें संबंधित और वास्तविक बनाने वाली अंतर्निहित खामियों और कमजोरियों पर जोर देता है।

कवि 'मा'यूब' का उपयोग अपूर्णता और मानवता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह हमारी साझा कमजोरियों और उनमें पाए जाने वाले सौंदर्य की याद दिलाता है।

कविता में, 'मा'यूब' हमारे गहरे सत्य को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है, हमारी अपूर्णताओं की स्वीकृति और समझ की प्रेरणा देता है।