Meaning of

मदह

madah • مدح

प्रशंसा; स्तुति

praise; commendation

تعریف; ستائش

Arabic

बिखरा पड़ा हूँ मुझे आग़ोश में न कर
मदहोश हूँ रहने दे तू होश में न कर

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ख़ुदा मुझ को बचाए अब सनम तुम्हारी आँखों से
फ़रिश्ते भी हुए मदहोश तो हम आदमी क्या हैं

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जब से मुँह को लग गई 'अख़्तर' मोहब्बत की शराब
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया

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खु़दी में क्यूँ सनम मदहोश रहती हो
सुना है तुम बहुत ख़ामोश रहती हो

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बाद-ए-सबा गुज़री अभी पैग़ाम उन का दे गई
ख़ुश्बू मोहब्बत की उधर मदहोशियाँ फैला रही

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बस तेरे नाम का करता हूँ मैं कसरत से व्रिद
सिवा नुक़सान के इस अम्ल में क्या रक्खा है

बिन पिए रहते हैं मदहोशी के आलम में हम
वाक़ई दोस्त मुहब्बत में मज़ा रक्खा है

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तेरे तिरछी नज़र से देखने के ही सबब मैं तो
सदा बेहोश बस दिन रात मैं मदहोश रहता हूँ

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बाज़ुओं को ग़ैर की मदहोश कर
शर्म तो आती नहीं होगी तुम्हें

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मदहोश है कोई तो कोई बे शुऊर है
हर दिल पे सुब्हो शाम ये कैसा सुरूर है

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वाइज़ भी इक निग़ाह से मदहोश हो गए
सादा दिली का आप की ऐसा नशा हुआ

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बिखरा पड़ा हूँ मुझे आग़ोश में न कर
मदहोश हूँ रहने दे तू होश में न कर

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ख़ुदा मुझ को बचाए अब सनम तुम्हारी आँखों से
फ़रिश्ते भी हुए मदहोश तो हम आदमी क्या हैं

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मूल रूप से, 'मदह' का अर्थ किसी की प्रशंसा या स्तुति करना है। कविता में, यह शब्द अक्सर गहरी भावनात्मक गूंज के साथ आता है, जो प्रशंसा और श्रद्धा के सार को पकड़ता है। यह हृदय से की गई सराहना और उन शब्दों की सुंदरता की छवि प्रस्तुत करता है जो विषय को ऊंचा करते हैं।

'मदह' का उपयोग कवि प्रिय, देवता या प्रकृति के प्रति प्रशंसा व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर आलोचना या उदासीनता के शब्दों के विपरीत रखा जाता है, जो भावना की शुद्धता और तीव्रता को उजागर करता है। यह शब्द साधारण प्रशंसा को भक्ति की कलात्मक अभिव्यक्ति में बदल सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'मदह' केवल प्रशंसा से परे जाकर मानवीय भावना की गहराई का प्रमाण बन जाता है। यह बोले गए शब्द की शक्ति का उत्सव है जो ऊंचा उठाता है और सम्मानित करता है।