Meaning of

महार

mahaar • مہار

लगाम; नियंत्रण

rein; control

لگام; کنٹرول

Sanskrit

तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

123

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा

मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

753

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

371

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

341

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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं
बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं

ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो
मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं

300

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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर
तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है

222

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कौन तुम्हारे पास से उठ कर घर जाता है
तुम जिस को छू लेती हो वो मर जाता है

207

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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है
तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है

ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ
तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है

173

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मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है
ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे

150

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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है

131

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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

123

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा

मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

753

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मूल अर्थ में, 'महार' घोड़े को दिशा देने के लिए उपयोग की जाने वाली लगाम को संदर्भित करता है, जो नियंत्रण और दिशा का प्रतीक है। कविता में, यह शब्द स्वतंत्रता और संयम के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाता है, और अक्सर आत्म-नियंत्रण और भाग्य के विषयों को उजागर करने के लिए उपयोग किया जाता है।

कवि अक्सर 'महार' का उपयोग इच्छा और अनुशासन के संघर्ष को दर्शाने के लिए करते हैं। यह प्रेम की लगाम का प्रतीक हो सकता है, जो हृदय को उथल-पुथल भरी भावनाओं के माध्यम से मार्गदर्शन करता है। यह शब्द जुनून की उग्रता के विपरीत है, नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करता है।

कवि के हाथों में, 'महार' जीवन के नाजुक संतुलन का रूपक बन जाता है। यह हमें अस्तित्व की अराजकता के माध्यम से मार्गदर्शन करने की कोमल कला की याद दिलाता है।