Meaning of

मक़्ते

maqte • مقطعے

अंतिम शेर; अंतिम पद

closing couplet; final verse

مقطعے; آخری شعر

Arabic

अब तो ख़्वाबों में ही उस सेे बात मेरी हो जाती है
काग़ज़ और क़लम होते हैं रात मेरी हो जाती है

ग़ज़लें लिखते-लिखते आँसू काग़ज़ पर गिरते हैं फिर
मतले से ले कर मक्ते तक मात मेरी हो जाती है

2

Download Image

हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे
दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है

11

Download Image

क्यूँ आ जाते हो सीधे मक़्ते पर
पहले थोड़ा काम करो मतले पर

4

Download Image

मैं हूँ तुम हो तुम हो मैं हूँ दुनिया से क्या नाता है
गीत ग़ज़ल के हर मक़्ते में नाम तुम्हारा आता है

3

Download Image

अब तो ख़्वाबों में ही उस सेे बात मेरी हो जाती है
काग़ज़ और क़लम होते हैं रात मेरी हो जाती है

ग़ज़लें लिखते-लिखते आँसू काग़ज़ पर गिरते हैं फिर
मतले से ले कर मक्ते तक मात मेरी हो जाती है

2

Download Image

हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे
दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है

11

Download Image

'मक़्ते' शब्द ग़ज़ल के समापन शेर को दर्शाता है, जहाँ कवि अक्सर अपना तखल्लुस प्रकट करते हैं। यह समापन और व्यक्तिगत उद्घाटन का भार वहन करता है, जो एक काव्यात्मक यात्रा के अंत को चिह्नित करता है। इस अंतिम पद में, कवि की पहचान और सार कविता की आत्मा के साथ जुड़ जाते हैं।

कवि 'मक़्ते' का उपयोग एक स्थायी छाप छोड़ने के लिए करते हैं, अक्सर एक व्यक्तिगत स्पर्श या दार्शनिक अंतर्दृष्टि को समाहित करते हैं। यह एक हस्ताक्षर के रूप में कार्य करता है, जो कविता के सार को समेटता है।

अपने समापन में, 'मक़्ते' एक कवि का विदाई है, एक क्षण जहाँ व्यक्तिगत और काव्यात्मक एक सामंजस्यपूर्ण अंत में मिलते हैं।