Meaning of

मज़ाक़

mazaq • مذاق

मज़ाक; परिहास; ठिठोली

joke; jest; mockery

مذاق; تمسخر; ٹھٹھا

Arabic

ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं
सऊबतों से जो घबरा गए हों घर जाएँ

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए
यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए

मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं
तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए

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बहुत मज़ाक़ उड़ाते हो तुम ग़रीबों का
मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो

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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया
मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया

दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा
तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया

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मज़ाक सहना नहीं है हँसी नहीं करनी
उदास रहने में कोई कमी नहीं करनी

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इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं
चंद लम्हों में फ़ैसला न करो

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ज़िंदगी से मिले हुए हो तुम
वो भी मुझ से मज़ाक़ करती है

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इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़

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वो अपने ख़ून से लिखने लगी है नाम मेरा
अब इस मज़ाक़ को संजीदगी से लेना है

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ये राह-ए-इश्क़ है आख़िर कोई मज़ाक़ नहीं
सऊबतों से जो घबरा गए हों घर जाएँ

14

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

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मूल रूप से 'मज़ाक' का अर्थ हल्के-फुल्के हास्य या परिहास से है। कविता में यह अक्सर उस नाजुक संतुलन को दर्शाता है जहाँ हँसी और दर्द एक-दूसरे में घुलमिल जाते हैं, और हास्य गहरे भावों का आवरण बन जाता है।

'मज़ाक' का उपयोग कवि जीवन की विडंबना को उजागर करने के लिए करते हैं। यह उस हँसी को दर्शा सकता है जो आँसुओं को छुपाती है, उस परिहास को जो दुःख को छुपाता है, या उस चंचल बातचीत को जो लालसा को छुपाती है।

कविता में 'मज़ाक' मानव भावनाओं की द्वैतता को दर्शाने वाला दर्पण बन जाता है। यह एक ढाल भी है और एक उद्घाटन भी।