Meaning of

महक़

mehek • محک

सुगंध; खुशबू; महक

fragrance; scent; aroma

خوشبو; مہک; عطر

Persian

जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ

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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

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कमरे में सिगरेटों का धुआँ और तेरी महक
जैसे शदीद धुँध में बाग़ों की सैर हो

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लो हमारा जवाब ले जाओ
ये महकता गुलाब ले जाओ

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उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को
साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए

डाल ने फूल की तरह पाला
ख़ार थे ना महक नहीं पाए

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इक महक सिम्त ए दिल से आई थी
मैं ये समझा तेरी सवारी है

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जिन के किरदार से आती हो सदाक़त की महक
उन की तदरीस से पत्थर भी पिघल सकते हैं

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तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुश्बू से सारा घर महके

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फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम

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तुम्हें देखे ज़माना हो गया है
नज़र महके ज़माना हो गया है

बिछड़के तुम सेे आँखें बुझ गई हैं
ये दिल धड़के ज़माना हो गया है

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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ

31

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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

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'महक़' शब्द उस नाजुक और सर्वव्यापी सुगंध की उपस्थिति को दर्शाता है जो हवा में बनी रहती है, स्मृतियों और भावनाओं को जागृत करती है। कविता में, यह अक्सर प्रेम या स्मृति की अदृश्य लेकिन गहराई से महसूस की गई उपस्थिति का प्रतीक होता है।

कवि 'महक़' का उपयोग प्रिय की उपस्थिति के सार या बीते युग की स्मृति को जागृत करने के लिए करते हैं। यह उन भावनाओं की सूक्ष्मता का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है जो देखी नहीं जातीं बल्कि महसूस की जाती हैं।

काव्यिक दुनिया में, 'महक़' वह अदृश्य धागा है जो दिल को स्मृतियों और सपनों से जोड़ता है।