Meaning of

मिशअले

mish'ale • مشعل

मशाल; प्रकाशस्तंभ

torch; beacon

مشعل; روشنی کا مینار

Arabic

तुम ने मुझ को क्या समझा जो छोड़ दिया
ईंट नहीं थीं तब भी घर तो बनते थे

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तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है
उसे दुल्हन भी बनते देखना है

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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में
तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं

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तुझे करनी है तो मुसावात कर
कि बेहतर हमारे भी हालात कर

मिटा दिल में बनते ये सहराओं को
ख़ुदा अपने बंदों पे बरसात कर

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तू मुझे बनते बिगड़ते हुए अब ग़ौर से देख
वक़्त कल चाक पे रहने दे न रहने दे मुझे

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उस ने पूछा कैसे मुमकिन है मेरे दिल तक जाना
मैं ने कहा तुम उर्दू सीखो रस्ता बनते जाना है

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अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के
फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता

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बड़े गुस्ताख़ निकले तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा
मेरी ही दी मशालों से मेरा ही घर जलाते हो

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इक कहानी की थी माँग ऐसी
उस में बस दो ही किरदार बनते

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है ज़रूरी शाइरों की आँख में आँसू रहे
खिलखिलाने से हमारे दिन नहीं बनते मियाँ

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तुम ने मुझ को क्या समझा जो छोड़ दिया
ईंट नहीं थीं तब भी घर तो बनते थे

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तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है
उसे दुल्हन भी बनते देखना है

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मशअल का शब्द अंधकार में मार्गदर्शक प्रकाश की छवि उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर आशा, मार्गदर्शन और प्रबोधन का प्रतीक होता है। मशाल केवल भौतिक प्रकाश का स्रोत नहीं है, बल्कि आंतरिक स्पष्टता और ज्ञान का रूपक है।

'मिशअल' का उपयोग कवि प्रकट या अंतर्दृष्टि के क्षणों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह एक कथा में एक मोड़ का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जहां नायक दिशा पाता है। अक्सर अंधकार के विपरीत, यह अज्ञानता और ज्ञान के बीच संघर्ष को उजागर करता है।

मिशअल काव्यात्मक परिदृश्य में एक प्रकाशस्तंभ के रूप में खड़ा है, उन रास्तों को रोशन करता है जो अभी खोजे जाने बाकी हैं। यह हम सभी के भीतर के प्रकाश की याद दिलाता है।